संदेश

Queen Elizabeth II : एक कॉर्गिस प्रेमी का जाना

चित्र
 8 सितंबर को महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के साथ-साथ एक कॉर्गिस प्रेमी युग का भी अंत हो गया। एलिजाबेथ के लिए कॉर्गिस हमेशा परिवार का एक सदस्य बनकर रहा। वह महारानी के जीवन का एक पूरा हिस्सा था। सिंहासन पर 70 साल बिताने के अलावा एलिजाबेथ द्वितीय ने अपने पूरे जीवन में कई रिकॉर्ड बनाए हैं उनमें से एक है जो उनकी सभी उपलब्धियों को मात देता है। यह, कॉर्गी कुत्तों के लिए महारानी का प्रेम था। महारानी ने अपने पति फिलिप्स से भी ज्यादा समय( 85 वर्ष) कार्गी के साथ बिताया। लिटिल लिलिबेट का पहला प्यार 'डूकी'  जब लिटिल प्रिंसेस लिलिबेट दस साल की भी नहीं थी, तभी से कार्गी के प्रति एलिजाबेथ का लगाव शुरू हुआ। यह 1930 का दशक था। बेशक, उनके माता-पिता यॉर्क के ड्यूक और डचेस के पास पहले से ही कुत्ते थे, लेकिन युवा एलिजाबेथ के लिए शराबी और प्यारे कॉर्गिस से ज्यादा सुंदर कोई नस्ल दूसरी नहीं थी। राजकुमारी ने पहली बार इस नस्ल के कुत्तों को मार्क्विज़ ऑफ़ बाथ के घर में देखा था, जहाँ वे अक्सर पूरे परिवार के साथ जाते थे। इसके बाद ड्यूक अपनी राजकुमारियों के लिए एक कार्गी खरीदकर लाए जिसे यॉर्क परिवार ने अपने कुत्

15 August Special: काकोरी कांड का बिजनौर कनेक्शन, जहां पर आजाद ने सीखी थी निशानेबाजी - Hindustan Posts

चित्र
पश्चिम यूपी का जिला बिजनौर न केवल अपनी सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, पौराणिक पहचान के रूप में प्रसिद्ध है बल्कि स्वतंत्रता समर में अपनी अग्रणी भूमिका निभाने के लिए भी बिजनौर को याद किया जाता है। स्वाधीनता संग्राम का प्रत्यक्ष गवाह रहा बिजनौर का सम्बन्ध प्रसिद्ध काकोरी काण्ड से रहा। 9 अगस्त 1925 को लखनऊ के निकट काकोरी स्टेशन पर सरकारी खजाने से चोरी करके क्रान्तिकारियों ने ब्रिटिश सरकार की चूल्हे हिला दी थी। काकोरी कांड से जुड़े कई क्रान्तिकारियों ने अज्ञातवास के दौरान क्रान्तिकारी शिवचरण त्यागी के निवास पर बिजनौर के पैजनिया गांव में शरण ली थी।  काकोरी घटना के बाद क्रान्तिकारी लोग ब्रिटिश शासन के अधीन हो गए थे। ब्रिटिश सरकार की पुलिस लगातार हमले कर रही थी। ऐसे में कानपुर के जाने माने देशभक्त पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी के निर्देश पर  क्रान्तिकारी  शहर पैजानियां पहुंचे जहां क्रान्तिकारी शिवचरण त्यागी ने उन्हें अपने घर में रखा था। शिवचरण त्यागी के पोते भोला नाथ त्यागी ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया था कि ठाकुर रोशन सिंह और अशफाक उल्ला खान, गणेश शंकर विद्यार्थी के साथ, सबसे पहले पैजानिया शहर प

Chandra Shekhar Special: चंद्रशेखर को और मौके मिलते तो वे सर्वश्रेष्ठ प्रधानमंत्रियों में से होते

चित्र
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के साथ में सामयिक इतिहास ने न्याय नहीं किया. करीब चार साल पहले राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का संस्मरण आया था जिसमें उन्होंने लिखा था "अगर चंद्रशेखर को और मौका मिला होता तो वो देश के सर्वश्रेष्ठ प्रधानमंत्रियों में से एक साबित हुए होते." जब वेंकटरमन राष्ट्रपति और चंद्रशेखर प्रधानमंत्री थे तो उन्होंने भी कहा कि चंद्रशेखर के पास अगर बहुमत होता तो बेहतर होता. क्योंकि एक तरफ वो अयोध्या में हल निकालने की कोशिश कर रहे थे तो दूसरी तरफ सिख समस्या को सुलझाने की कोशिशों में लगे थे. कश्मीर में सकारात्मक कदम उठाए जा रहे थे. असम में चुनाव कराए गए.  सिर्फ चार महीने की सरकार इतने बड़े काम लेकर निर्णायक रूप से आगे बढ़ रही थी और यही कांग्रेस को अखर रहा था. चंद्रशेखर सफलता की ओर और ज्यादा न बढ़े इसलिए कांग्रेस ने सरकार को गिरा दिया. जबकि इस वादे के साथ चंद्रशेखर ने शपथ ली थी कि, कम से कम एक साल तक सरकार को चलने दिया जाएगा. कांग्रेस के डरने के पीछे भी अहम कारण थे. दरअसल चंद्रशेखर का व्यक्तित्व ही कुछ ऐसा था, एक प्रसंग है - चंद्रशेखर ने ऑपरेशन ब्लूस्टार को "हिमालयन

ब्लॉग: वो दो शख्सियतें जिन्हें इन्दिरा ताउम्र नहीं भुला पाईं - Hindustan Posts

चित्र
वर्ष था 1975। प्रयागराज जिसे गंगा और यमुना नदियों के संगम के स्थान के रूप में जाना जाता है वो अब प्रतिद्वंद्वी सियासत का सबब बनने जा रहा था।मामला मार्च 1971 में हुए आम चुनावों में कांग्रेस पार्टी को जबरदस्त मिली जीत को लेकर था।भारत की आजादी के बाद से, सत्तारूढ़ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस रायबरेली से कभी चुनाव नहीं हारी थी। इंदिरा गांधी के पति फिरोज गांधी ने 1951-52 में भारत के पहले चुनाव में वह सीट जीती थी, और उन्होंने पांच साल बाद अपने प्रदर्शन को दोहराया था।अब इंदिरा की बारी थी कि वे इस निर्वाचन क्षेत्र पर एक बार फिर से अपनी दावेदारी पेश करें। वहीं राजनारायण के व्यक्तित्व के बावजूद यह उनके लिए अच्छा मौका था। यदि राजनारायण चुनाव जीतते तो यह सम्भव था कि गांधी परिवार अपने दामन प्रिय निर्वाचन क्षेत्र को हमेशा के लिए खो बैठता। लेकिन चुनाव में राज नारायण हार गए, उन्हें कुल मतों का केवल एक चौथाई हिस्सा हासिल हुआ, इंदिरा गांधी ने उन्हें दो-तिहाई मतों के साथ पछाड़ दिया।राजनीतिक नुकसान से निराश होकर, राज नारायण ने ट्रैक बदल दिया, और लड़ाई को कानूनी क्षेत्र में स्थानांतरित करने का फैसला किया। उन

रतन टाटा और शिव नाडर हिंदी में क्यों बोलते हैं?- Hindustan Posts

चित्र
जब कॉरपोरेट इंडिया के महापुरूष रतन टाटा और एचसीएल के फाउंडर चेयरमैन शिव नाडर किसी विषय पर बोलते हैं तो आपको सुनना पड़ता है। वे असल में भारतीय कॉरपोरेट जगत के रखवाले हैं। उन्होंने अपने क्षेत्र में जो हासिल किया है, वह अचंभित कर देने वाला है। यदि हिंदी के जाने-माने विरोधी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन करुणानिधि अपने राज्य के लोगों पर हिंदी थोपने के खिलाफ बोलते हैं, तो शिव नाडर अपने करियर को बनाने में हिंदी की भूमिका के बारे में क्या कहते हैं, इस पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। कुछ साल पहले तिरुचिरापल्ली में सेंट जोसेफ कॉलेज हायर सेकेंडरी स्कूल के छात्रों को संबोधित करते हुए, एचसीएल टेक्नोलॉजीज के संस्थापक ने छात्रों को यह याद दिलाने की कोशिश की कि, भारत एक बड़ा देश था और देश में आबादी का महत्वपूर्ण वर्ग हिंदी समझता था। उन्होंने आगे कहा- "हिंदी सिर्फ भारतीय राज्यों में ही नहीं बोली जाती। इसे विभिन्न देशों के लोग समझते हैं क्योंकि भारतीय हर जगह हैं। जब आप दूसरे देशों में जाते हैं तो इससे आपको मदद मिलेगी।" अरबपति और नेक दिल उद्योगपति शिव नाडर ने भी इस बात को रेखांकित किया कि उन

एक अदबी एक्टर इरफान की याद - Hindustan Posts

चित्र
इरफान को दो साल बीत चुके हैं। इरफान का जाना केवल एक एक्टर की क्षति नही है बल्कि अदब, तहज़ीब, इल्म और एक खास तरह की फकीरी ये सब इरफान के साथ-साथ दफन हो गई। इरफान से ज्यादा प्रतिभाशाली एक्टर बॉलिवुड ने दिए लेकिन अदब के मामले में बॉलिवुड, हॉलिवुड, टाॅलीवुड, धनियावुड, मिर्चीवुड...इति इति) भी पानी मांगते हैं। इरफान गजब का नही अदब का एक्टर है। गजब का एक्टर होने के लिए डायरेक्टर्स का कन्ट्रोल रूल लागू होता है, लेकिन इरफान का इल्म इसकी इजाजत नही देता है। इरफान ने हॉलीवुड में अपने एक्सपीरियंस को लेकर एक किस्सा शेयर किया था। इस किस्से में वह बताते हैं कि एक हॉलीवुड फिल्म की शूटिंग के दौरान डायरेक्टर ने उनसे डिमांड की थी, कि उन्हें इस सीन में अपना कुर्ता उतार कर बेड पर जाना होगा। ऐसे में इरफान खान ने अपने कपड़े उतारने से मना कर दिया। आपकी अदालत शो में एक्टर इरफान खान ने बताया था- ‘एक डायरेक्टर थे हॉलीवुड में, उन्होंने कहा आपका ये इंटीमेट सीन है और आप ये कुर्ता उतार दो। मैं बोला अरे मैं कुर्ता तो नहीं उतारूंगा। वो डायरेक्टर बोले- अरे तुम बेड पर हो, सो रहे हो, तुम कपड़े उतारके नहीं सोओगे? मैंने कहा

Chandra Sekhar Singh Jayanti: चंद्रशेखर को और मौके मिलते तो वे सर्वश्रेष्ठ प्रधानमंत्रियों में से होते

चित्र
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के साथ में सामयिक इतिहास ने न्याय नहीं किया. ढाई साल पहले राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का संस्मरण आया था जिसमें उन्होंने लिखा था अगर चंद्रशेखर को और मौका मिला होता तो वो देश के सर्वश्रेष्ठ प्रधानमंत्रियों में से एक साबित हुए होते.  जब वेंकटरमन राष्ट्रपति थे और चंद्रशेखर प्रधानमंत्री थे तो उन्होंने भी कहा कि चंद्रशेखर के पास अगर बहुमत होता तो बेहतर होता. क्योंकि एक तरफ वो अयोध्या में हल निकालने की कोशिश कर रहे थे तो दूसरी तरफ सिख समस्या को सुलझाने की कोशिशों में लगे थे. कश्मीर में सकारात्मक कदम उठाए जा रहे थे. असम में चुनाव कराए गए.  सिर्फ चार महीने की सरकार इतने बड़े काम लेकर निर्णायक रूप से आगे बढ़ रही थी और यही कांग्रेस को अखर रहा था. चंद्रशेखर सफलता की ओर और ज्यादा न बढ़े इसलिए कांग्रेस ने सरकार को गिरा दिया. जबकि इस वादे के साथ चंद्रशेखर ने शपथ ली थी कि, कम से कम एक साल तक सरकार को चलने दिया जाएगा. कांग्रेस के डरने के पीछे भी अहम कारण थे. दरअसल चंद्रशेखर का व्यक्तित्व ही कुछ ऐसा था, एक प्रसंग है -  चंद्रशेखर ने ऑपरेशन ब्लूस्टार को "हिमालयन ब्लंडर"