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गाँधीवाद दर्शन से दूर जाता समाज

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Hind Posts Hind Posts "आज पूरा विश्व महात्मा गाँधी की 151 वीं जयंती पर फिर गाँधीवाद दर्शन की ओर झांक रहा है। पूँजीवाद की मृगतृष्णा से कुंठित गांधीवाद ही सदमार्ग है" यदि वर्तमान समय में गांधीवाद दर्शन की बात की जाए, तो उसके तत्व बहुत ही कम देखने को मिलते हैं। कोरोना संकट से उपजा उन्माद ही आज वैमनस्य का दर्शक है। महात्मा गांधी ने सभी को अपने दर्शन से प्रभावित किया, गांधी ने कहा - "धन मनुष्य के लिए है न कि मनुष्य धन के लिए"। उन्होंने दिनांक 21-10-1926 को प्रकाशित" यंग इन्डिया " में धर्म या रिवाज द्वारा लादे गए वैधव्य को बोझ माना। अहिंसा के अथक पुजारी ने सत्य को अपना धर्म मानते हुए कर्म के मार्ग पर बढ़ते हुए जाने को सर्वश्रेष्ठ धर्म माना। गांधीवाद कहता है कि जब तक आप पर कोई अवांछित टिप्पणी या प्रहार ना करे तब तक आप भी प्रहार ना करें। " उन्होंने यह भी कहा कि यदि मेरी भारत माता की इज्जत को कोई लूटने की कोशिश करें और मुझसे कोई यह पूछे कि आप हथियार उठाना ज्यादा पसंद करेंगे या चुप्पी साधना। तब उन्होंने कहा कि मैं हथियार उठाना ही ज्यादा पसंद करूंगा क्योंकि रा