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रानी दुर्गावती आत्मसम्मान से भरी नायिका

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महोबा के चंदेल राजपूत शासक की पुत्री दुर्गावती सोलहवीं शताब्दी में गोंडवाना की प्रगति शासक बनीं। दुर्गावती बहादुर महिला थी उन्होंने मध्यप्रदेश स्थित मालवा के शासक बाज बहादुर के आक्रमण से अपने राज्य की रक्षा करने के साथ-साथ तेजी सेे बढ़ते मुगल साम्राज्यवाद को भी रोका। मालवा के अफ़गान लोगों से उनकी कई बार मुठभेड़ हुईं जिसमें वह सदैव विजेता रहींं। बन्दूक चलाने और तीरंदाजी में वो माहिर थीं हीं। इतिहास गवाह है सन् 1564 में जब अकबर ने आसिफ खान को आदेश दिया कि गोंडवाना को दबाया जाए तो दुर्गावती ने मुगल आधिपत्य स्वीकार करने से इंकार कर दिया। दुर्गावती ने मुगल आक्रमण का मुकाबला किया। इस युद्ध में उनका बेटा भी घायल हुआ। इस युद्ध में मुगल सेना उन पर भारी होती जा रही थी इस दौरान दुर्गावती परास्त होने लगीं तो उन्होंने रण छोड़ने से इंकार किया और शत्रु के हाथो बंदी बनने के बजाय दुर्गावती ने आत्महत्या कर ली। अबुल फजल ने लिखा है कि "साहस और प्रयासो का दुर्गावती में अभाव नहीं था उनका स्मारक आज भी वहीं बना है जिस खाईं में वो गिरी थीं।"                           मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के सम