संदेश

शख्सियत लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Ganesh Shankar Vidyarthi Birthday : साम्प्रदायिकता से दो-दो हाथ करने वाले पत्रकार गणेश शंकर 'विद्यार्थी'

चित्र
बात 1915 की है जब गणेश शंकर विद्यार्थी जी महज 25 साल के थे। उन्होंने 'राष्ट्रवाद' सम्बंधित शीर्षक से कुछ लेख लिखे, जिसमें उन्होंने न केवल युवाओं का ध्यान ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ लड़ने के लिए आकर्षित किया, बल्कि राष्ट्रवाद और धर्मांधता के बीच अंतर को भी बखूबी तरीके से समझाया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद सांप्रदायिक पहचान पर आधारित नहीं होना चाहिए, इसकी उत्पत्ति राज्य की प्रकृति पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा प्राकृतिक सीमाओं और विविधता ने राष्ट्र को दुनिया से अलग रखा है और राष्ट्रीय भावना का विकास मानव जाति के विकास की दिशा में एक कदम है। यह स्वतःस्फूर्त था, कुछ आदर्शों पर आधारित था और सच्ची देशभक्ति को पोषित करता था। उन्होंने महसूस किया कि धर्म हमेशा मानव प्रगति के लिए एक बाधा है। राष्ट्रीय भावना एक लहर थी जिसने उन्नीसवीं सदी में दुनिया को झकझोर कर रख दिया था। जो लोग हिंदू राष्ट्र में विश्वास करते थे, उनके अनुसार वे लोगों को मूर्ख बना रहे थे क्योंकि वे राष्ट्र का अर्थ नहीं समझ सकते थे हालांकि वे भविष्यवक्ता नहीं थे, उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि इतने लंबे समय तक भारत पर एक