Death anniversary: परदे के पीछे मीना कुमारी..

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प्रसिद्ध फिल्म डायरेक्टर कमाल अमरोही के नाते मीना कुमारी का नाम अमरोहा की आलमी शख्सियतों के साथ भी जुड़ गया है। आज मीना कुमारी की पुण्यतिथि है। मीना कुमारी फिल्म इंडस्ट्री में आजाद ख्याल का चेहरा बनकर रहीं, स्वयं अपने शौहर की बंदिशों में भी नहीं बंध सकीं। मीना कुमारी के अन्तिम दिनों का जिक्र करती हुई,कमाल अमरोही साहब की बेटी रुखसार अमरोही, पाकिस्तानी अखबार डॉन को दिए एक इंटरव्यू में कहतीं हैं,मीना कुमारी अपने अंतिम दिनों में, केवल कमाल अमरोही को अपने अपार्टमेंट में बुलाती थीं। वो अभी भी बाबा(कमाल) की बहुत परवाह करती थीं। रुखसार कहती हैं, ''मैं भी उनके साथ उस जब अपार्टमेंट में जाती थी, तो छोटी अम्मी (मीना) दर्द की गर्त में डूब जाती थी।"

 एक बार एक पार्टी में मेरे बाबा को पान की पेशकश की गई थी। इसे खाते ही उन्हें लगा कि उनका सिर घूमने लगा है, जैसे-तैसे बाबा बेहोशी की हालत में घर पहुंचे। हम सभी बहुत चिंतित थे और छोटी अम्मी को फोन किया तो तुरंत हमारे अपार्टमेंट में आ गईं। वह सीढ़ियाँ नहीं चढ़ सकती थी इसलिए हम उनसे मिलने नीचे गए। वह वास्तव में चिंतित थीं। उन्होंने हमसे कहा कि, भविष्य में बाबा को किसी भी पार्टी में न जाने दें।"अम्मी ने कहा था कि,"लोग उसे जहर देंगे क्योंकि वे उससे ईर्ष्या करते हैं" पाकीज़ा की रिहाई के दो महीने बाद, मार्च 1972 में मीना कुमारी की 40 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई।

मीना कुमारी के जाने के बाद रुखसार कहती हैं एक और दिल टूट गया,“जब मीनाजी की मृत्यु हुई और बाबा ने उन्हें दफनाया, तो उन्होंने अगले दिन अखबारों में पढ़ा कि मीना कुमारी ने अपनी निजी डायरी और कुछ शायरी एक करीबी विश्वासपात्र मित्र को दे दी थी। मीना कुमारी के मित्र ने अखबार में लिखा कि, "अगर वह(कमाल) उसका पति होता या उसने कभी कमाल से प्यार किया होता, तो उसे अपने पति कमाल अमरोही को अपना निजी लेखन देना चाहिए था।

रुखसार कहतीं हैं,कमाल अमरोही और मीना कुमारी अब मुंबई के एक कब्रिस्तान में अगल-बगल दफन हैं। "मेरी माँ भी मेरे बाबा के अंतिम विश्राम स्थल के बगल में दफन हैं," मैंने अपने बाबा के नाम से उन गालियों को दूर करने का जिम्मा अपने ऊपर ले लिया है जो भारतीय मीडिया ने उन पर डाली हैं। मैंने उन 500 पत्रों को सार्वजनिक नहीं किया है जो उनके बीच आदान-प्रदान किए गए थे। वे असली सबूत हैं। मैंने अपने बच्चों से कहा है कि मेरे मरने के बाद उन्हें फेंक दो। किसी को भी उन्हें नहीं पढ़ने देना चाहिए क्योंकि बाबा को गलत समझा जाएगा और उन पत्रों का दुरुपयोग किया जाएगा। रुखसार कहतीं हैं, कमाल अमरोही और मीना कुमारी की शादीशुदा जोड़े के रूप में अब और बदनामी नहीं होनी चाहिए। 

रुखसार का मानना था कि मेरे बाबा को मीना कुमारी से अलग होने के बाद से भारतीय मीडिया के कारण टोंट झेलने पड़े हैं। रुखसार अपने बाबा से बेइंतहा मोहब्बत करतीं, वो नहीं चाहती इस रिश्ते के दलदल में केवल उनके बाबा का नाम ही आए।इसका एक उदाहरण साल मई 2008 में आया। रुखसार ने गीतकार निदा फ़ाज़ली के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया। उन्होंने अप्रैल महीने में एक प्रमुख उर्दू अखबार में एक लेख लिखा था, जिसमें कमाल साहब को 'स्वार्थी और कृतघ्न पुरुष' के रूप में चित्रित किया गया था। रुखसार के वकील रिजवान सिद्दीकी ने कहा, "अमरोही की बेटी रुखसार को लगता है कि यह सरासर झूठ और मानहानिकारक है और इसलिए मुकदमा दायर किया गया है।" 

सिद्दीकी ने कहा, "पत्र में फाजली के लेख के अंशों में कहा गया है कि, सोहराब मोदी जिन्होंने अमरोही को ब्रेक दिया, के साथ निर्देशक ने दुर्व्यवहार किया।" इसमें अमरोही को पूरी तरह से आत्मकेंद्रित व्यक्ति के रूप में चित्रित किया गया। सिद्दीकी ने दलील दी कि, "कमाल अमरोही के खिलाफ इस तरह लिखने का अधिकार फाजली को किसने दिया है?"

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