बापू मुझे माफ़ करना मैं भगत सिंह को माफीनामे के लिए मना नहीं सका







शहीद भगत सिंह की फांसी से होने वाले विद्रोह को लेकर ब्रिटिश सरकार कांप कर रही थी दरअसल भगत सिंह की शहादत के बाद देशभर में होने वाले विद्रोह की ताकत को ब्रिटिश सरकार भली-भांति जानती थी इसलिए ब्रिटिश सरकार चाहती थी कि किसी भी तरह भगत सिंह ब्रिटिश सरकार से माफ़ी मांग लें इससे विद्रोह भी नहीं होगा और हमारी शान में कसीदे भी पढ़े जाएंगे.. इसके लिए खुरापाती योजना बनाई गई।
 तत्कालीन वायसराय लार्ड इरविन ने गांधीजी के समक्ष भगत सिंह की फांसी को स्थगित करने या स्थाई तौर पर रोकने का प्रस्ताव रखा। भगत सिंह की फांसी को रोकना ... वायसराय के मुंह से प्रस्ताव सुनकर गांधी जी कुछ देर अचरज में पड़ गए। गांधीजी ने पूछा कि, क्या यह बिना किसी शर्त के मंजूर है? तब वायसराय ने कहा, आपको केवल इतना करना है, भगत सिंह का बयान लिखित में लेना है। गांधी जी बोले कैसा बयान? "बस यही कि मैंने जो ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध अब तक षड्यंत्र किया, मैं उसके लिए माफी चाहता हूं बस..!!" गांधीजी ने कहा मैं कैसे कह सकता हूं कि भगत सिंह की इस बारे में राय क्या है ? वायसराय बोले ठीक है मैं आपको 1 वर्ष का समय देता हूं। गांधी जी ने भी आशापूर्ण आह भरते हुए कहा, ठीक है। चलो मैं, भगत सिंह से बात करता हूं।

 गांधी जी के एक अच्छे मित्र हुआ करते थे जो इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकील के पद पर थे मूल रूप से कश्मीर के रहने वाले थे जिनका नाम था तेज बहादुर सप्रू। गांधी जी ने तेज बहादुर सप्रू को लंदन से एक टेली भेजा। जिसमें लिखा था कि,"सप्रू तुम्हें भगत सिंह को ब्रिटिश सरकार से माफीनामा के लिए मनाना होगा।" भगत सिंह से माफीनामा लिखवाना तौबा-तौबा..! लेकिन सप्रू को प्रयास तो करने ही थे।

 तेज बहादुर सप्रू प्रस्ताव लेकर मुंह लटकाए भगत सिंह के पास पहुंचे। बोले, भगत देखो अगर तुम आजाद हो गए तो तुम कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक लाखों भगत सिंह खड़ा कर सकते हो, भगत सिंह ने कहा कि, "आप गलत कह रहे हो श्रीमान! कम से कम यह भारतवर्ष में तो नहीं होता है। यहां प्रत्येक भारतवासी मरने से ज्यादा मरने तक की पीड़ा से ज्यादा डरता है इसलिए मैं भी यह पीड़ा कैसे सहन कर सकता हूं ?अगर मैं मर गया तो मेरे जैसे लाखों भगत सिंह पैदा होंगे लेकिन यदि मैं जीवित बच गया तो मेरे साथियों का बलिदान और मेरी संपूर्ण क्रांति विफल हो जाएगी" 

भगत सिंह के शब्द सुनकर तेज बहादुर सप्रू की आंखें आंसुओं से नम हो गई, सप्रू बिना किसी देरी के लाहौर सेंट्रल जेल से बाहर निकल आएं और गांधी जी से क्षमायाचना मांगते हुए  उन्हें टेली में लिखा, "बापू मुझे माफ़ करना मैं भगत सिंह को माफीनामे के लिए मना नहीं सका।"

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